Monday, June 25, 2007

मॉं कहा करती थी.......!!!





मॉं, याद है मुझे, तेरी वो बातें

वो किस्से, वो यादें, वो तारों भरी रातें

कलेजे से साटे तू ही कहा करती थी मॉं, कि-


दूर आकश में परियां रहा करती हैं

जो मन उनको भाये, उससे मिला करती हैं !


आती हैं चुपके से, करती हैं बातें

फिर ढेर सारे सपनें, फिर ढेर सी सौगातें....


मॉं! याद है मुझे-

चॉंद को दिखाकर तू हि तो समझाती थी

सुंदर-सुंदर परियों की देश जिसे बताती थी



मैं जब पूछता था अबोध सा-

"मॉं ! क्या मुझे भी कोई परी मिलेगी?"



इस बात पे तू खुब हंसा करती थी

झट से मेरे गालों को, तू चुम लिया करती थी

फिर कहती थी बडे दुलार से-

मिलेगी कोई परी तेरे इस लाल से.......



हाथों मे उसके भी, जादू कि छ्डी होगी

चमकते लंबे बाल, चांद की वह मूरत होगी



सुनहले चांदी के होंगे उसके पंख

दूर देश लेजायेगी, मुझे भी अपने संग !!



तेरी इस बात पर, मैं डर जाया करता था, मॉं

तुझे खोने की भय से, मैं रो देता था मॉं



फिर पोंछ के मेरे आंसू, तू निंदिया को बुलाती थी...

माथे पे देके थपकी, आंचल मे छुपाती थी..



याद है, मुझे सब कुछ याद है मॉं

आंचल मे लिपटे तेरी हर एक बातें-



वो परियों के किस्से, वो सपनों भरी रातें !!

सब कुछ याद है मॉं, सब कुछ........



वक्त कि तेज आंधी का एक धूल भी नहीं पडा

बस वो गोद तेरी नहीं है, अकेला हूं मैं



पर हां मॉं,

तेरी वो बात बिल्कूल सच निकली-

सुंदर सी एक परी, मुझे भी थी मिली



वैसी हीं बातें, वही सौगातें

वही जदू की छ्डी, वही चांदनी लडी



खुश था मॉं, मैं अपने इस हाल से-

जब मिली थी वो परी तेरे इस लाल से.....



पर शायद मैं भूल गया था,

तेरी एक बात-

उड जाती हैं परियां, छोड के एक दिन साथ

हां मॉं, मैं सचमुच भूल गया था, कि-



सपनें भी कहीं सच हुआ करते हैं,

परियों के तो पंख भी हुआ करते हैं......

परियों के तो पंख भी हुआ करते हैं....


................................dimagless

2 comments:

Monika (Manya) said...

मां की ममता.. बचपन की कहानियों... परी की यादों क खूब्सुरत संगम है...यादें, प्रेम, विछोह सब हैं.. तन्हाई भी दिखती है.,.. बेहद खूब!! पर एक बात कहूंगी.. आगे और बेहतर की उम्मीद है....

मान्या

Unknown said...

ma is shabad me hi sab kuch hai uske baad aapki lekhni ne mano ek paal ke liye mujhe ma ke haathon se niwala khila diya. aisa laga mano abhi abhi ma mere paas aai or mujhse puch ke gayi ki
BETA MAI TO APNE HAAL ME KHUS HUN, TUM KHUS HO KI NAHI KOI PARESHANI TO NAHI HAI
or last me unka ye puchna ki-
BHAIYA GHAR KAB AA RAHE HO,
MAIN JAANA CHAHTA HUN.......
LEKIN MAJBOOR HUN
or jaab bahan puchati hai ki-
BHAIYA KYA KAR RAHE HO EK PHONE BHI NAHI KAR SAKTE, YE BATAO RAKSHABANDHAN ME TO TUMHE CHUTTI MIL JAEGI
or har baar main yahi kahta hun ki-
HA MAIN EK DAM THIK HUN, MAST HUN
SAB KUCH THIK HAI, MAIN DEKHTA HU SHAYAD RAKSHABANDHAN ME 2 DIN KI CHUTTI MIL GAYE.
such ajaad desh ke hum nagrik kitne bandhan me hai ki rakshabandhan ke liye bhi bahan ko puchna padta hai ki TUM PAKKA TUM AA TO JAOEGE.